October 2, 2017

रामलीला हो चुकी है


रामलीला हो चुकी है
दर्शकों के दल घरों में खो गये

और पात्रों ने उतारे
मुकुट, बंदर के मुखौटे
काम जिनके पास था तो
काम पर वे लोग लौटे
धो लिया चेहरा ज़रा सा
राक्षस सब आदमी से हो गये

उड़ गयी रंगत गुलाबी
खुल गया फिर रंग भूरा
फिर ग़रीबी मुस्करायी
दिक्कतों ने खूब घूरा
लौटने का मन नहीं था
पर ज़रूरत ने बुलाया तो गये

क्या विजेता क्या पराजित
मंच के नीचे खड़े हैं
धनुष,रावण के खडग सब
एक झोले में पड़े हैं
आँख में आंसू भरे हैं
राम रावण फिर दरी पर सो गये

-ज्ञान प्रकाश आकुल

1 comment:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, भूत, वर्तमान और भविष्य “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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